भारत पर वंशानुगत राज्य होने का दावा: ओर बाबर की भारत मे उपलब्धियां

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बाबर, तैमूर लंग का वंशज होने के कारण तैमूर द्वारा विजित भारतीय क्षेत्रों को अपने वंशानुगत राज्य में होने का दावा करता था। जब तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया था तब उसने पंजाब के पश्चिमी भाग को अपने राज्य में मिला लिया था परन्तु बाद में अफगानों ने उस पर अपना अधिकार जमा लिया था। इसलिये बाबर पंजाब पर अपना वंशानुगत अधिकार समझता था और उसे फिर से पाना चाहता था।

काबुल तथा गजनी पर अधिकार:

(काबुल तथा गजनी पर अधिकार: समरकंद तथा फरगना के हाथ से निकल जाने के बाद बाबर काबुल तथा गजनी पर अधिकार जमाने में सफल रहा था इस कारण उसके राज्य की सीमा भारत के काफी निकट आ गई थी। (5.) भारत की अपार सम्पत्ति प्राप्त करने की लालसा: बाबर भारत पर आक्रमण करके अपने पूर्वजों की भांति अपार सम्पत्ति प्राप्त करना चाहता था। (6.) काफिरों को नष्ट कर इस्लाम फैलाने की लालसा: बाबर की धमनियों में तैमूरलंग तथा चंगेज खाँ का रक्त विद्यमान था। इसलिये बाबर भी उनकी तरह भारत के काफिरों को मारकर इस्लाम फैलाने को लालायित था।

भारत की परिस्थितियाँ

(7.) भारत की परिस्थितियाँ: भारत की तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों ने भी बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिये उत्साहित किया। वह जानता था कि भारत का कोई भी प्रांतीय शासक तथा राणा सांगा, इब्राहीम लोदी का साथ नहीं देगा। (8.) लाहौर के अफगान अमीरों का निमंत्रण: लाहौर के अफगान अमीरों ने बाबर को दिल्ली पर आक्रमण करने के लिए आमन्त्रित करने का निश्चय किया। आलम खाँ तथा दौलत खाँ के पुत्र दिलावर खाँ को बाबर के पास भेजकर आग्रह किया गया कि बाबर इब्राहीम लोदी को दिल्ली के तख्त से हटाकर, आलम खाँ को सुल्तान बनाने में सहायता करे क्योंकि इब्राहीम लोदी बड़ा ही क्रूर तथा निर्दयी शासक है। इससे बाबर ने भारत पर आक्रमण करने की तैयारियाँ आरम्भ कर दीं। बाबर की भारत में उपलब्धियाँ भारत में बाबर की उपलब्धियाँ तीन प्रकार की हैं-

(1.) सामरिक उपलब्धियाँ, (2.) राजनीतिक उपलब्धियाँ तथा (3.) सांस्कृतिक उपलब्धियाँ। इन तीनों उपलब्धियों का आधार सामरिक उपलब्धियाँ ही हैं। अतः सबसे पहले उसकी सामरिक उपलब्धियों का अध्ययन करना उचित होगा। भारत पर बाबर के प्रारंभिक आक्रमण पहला आक्रमण: 1519 ई. में बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण किया। उसने बाजोर के दुर्ग को घेर लिया। दुर्ग में नियुक्त सैनिक बाबर की बंदूकों के समक्ष नहीं टिक सके। अलीकुली ने तोपों का प्रयोग किया। कुछ ही घण्टों में तीन हजार सैनिक मारे गये। बाबर ने बाजोर में रहने वाली हिन्दू जनता के साथ बड़ा कठोर व्यवहार किया। समस्त पुरुषों को मौत के घाट उतार दिया गया तथा स्त्रियों एवं बच्चों को गुलाम बना लिया गया। इसके बाद उसने झेलम के तट पर स्थित भीरा को अपने अधिकार में ले लिया। भीरा के लोगों ने बिना लड़े ही भीरा बाबर को समर्पित कर दिया।

बाबर की राजनीतिक उपलब्धियाँ

दूसरा आक्रमण: 1519 ई. में बाबर ने भारत पर दूसरा आक्रमण किया। वह युसूफ जई अफगानों को अपने अधीन करके पेशावर पर अधिकार जमाना चाहता था किंतु उसी समय बदख्शां में उपद्रव हो गया और बाबर इस आक्रमण को अधूरा छोड़कर लौट गया। तीसरा आक्रमण: 1520 ई. में बाबर बाजोर, भीरा होता हुआ स्यालकोट तक आ पहुँचा। बाबर स्यालकोट से आगे बढ़ता इससे पहले उसे समचार मिला कि कांधार के शासक शाह बेग अर्जुन ने बगावत कर दी है। अतः बाबर स्यालकोट से वापस लौट गया। 1522 ई. में उसने कांधार पर अधिकार कर लिया तथा अपने दूसरे पुत्र कामरान को वहाँ का सूबेदार नियुक्त किया। चौथा आक्रमण: पंजाब के सूबेदार दौलत खाँ ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी से स्वतंत्र होने के लिये बाबर को दिल्ली सल्तनत पर आक्रमण करने का निमंत्रण भिजवाया। 1524 ई. में बाबर सेना लेकर चौथी बार भारत आया। इब्राहीम लोदी पंजाब की गतिविधियों से अनजान नहीं था। उसने एक सेना पंजाब पर आक्रमण करने भेजी जिसने बड़ी सरलता से लाहौर पर अधिकार कर लिया। इसी बीच बाबर की सेना ने लाहौर पर आक्रमण कर दिया। दिल्ली की सेना परास्त हो गई तथा बाबर ने लाहौर पर अधिकार जमा लिया।

अब बाबर की सेना लाहौर से आगे बढ़ी और उसने दिपालपुर पर अधिकार कर लिया। चूँकि बाबर के साथी आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं थे और उसे अपने राज्य में उजबेगों का विद्रोह होने की भी सूचना मिली इसलिये बाबर दिपालपुर से काबुल लौट गया। पाँचवां आक्रमण: बाबर के काबुल लौट जाने पर दौलत खाँ तथा दौलत खाँ के चाचा आलम खाँ ने दिल्ली पर आक्रमण किया परन्तु इब्राहीम लोदी की सेना ने उन्हें मार भगाया। इस पर आलम खाँ तथा दौलत खाँ का पुत्र दिलावर खाँ, बाबर की शरण में पहुँचे। उनके निमंत्रण पर बाबर ने पुनः दिसम्बर 1525 में विशाल सैन्य के साथ भारत के लिए प्रस्थान किया। जब वह मार्ग में ही था तब उसे सूचना मिली कि दौलत खाँ अपनी सेना लेकर लाहौर की ओर बढ़ रहा है। इसलिये बाबर ने अपनी चाल तेज कर दी और दौलत खाँ के लाहौर पहुँचने से पहले लाहौर पर अधिकार कर लिया। इस पर दौलत खाँ के साथी घबरा उठे और वे दौलत खाँ का साथ छोड़कर बाबर से जा मिले। दौलत खाँ ने भी विवश होकर बाबर के समक्ष समर्पण कर दिया। बाबर ने दौलत खाँ को बंदी बनाकर भेरा भेज दिया किंतु भेरा पहुँचने से पहले ही दौलत खाँ की मृत्यु हो गई। इस प्रकार पंजाब पर बाबर का अधिकार हो गया।

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